hindi stories in short शान्ति की खोज

hindi stories in short

hindi stories in short शान्ति की खोज

hindi stories in short शान्ति की खोज

चारों तरफ सन्नाटा था। कहीं कोई दिखाई ना देता था। अथाह जल के सिवा। बस्ती, टीले, पेड, आदि सब डूबे थे। कहीं कोई ना था।

         चारों तरफ निगाह दौड़ाता था कि कहीं तो कोई मिले जिसे अपना कह सके। जिसके सहारे जीवन के सूने नक्शे में रंग भरे जा सके। परंतु वहां सिवाय सन्नाटे के कोई आवाज ना थी। आज चार दिन होने को आए थे पेड़ की डाल पर बैठे नीचे उतरने का कोई साधन ना था।

         पाँचवे दिन पानी उतरना शुरू हुआ। मंदिर का शिखर दिखाई देने लगा। धीरे-धीरे पूरा मंदिर दिखाई देने लगा। फिर और पानी उतरा तो पशुओं के छप्पर भी दिखाई देने लगे। परंतु वहां सिवाय लाशों के कुछ ना था। जैसे-जैसे पानी उतरता गया उसके दिल में खुशी की तरंगे चमकने लगी। ऐसा भी दिन आया कि उसे नीचे उतरने की जगह मिल गई।

hindi stories in short शान्ति की खोज

         वह नीचे उतरा परंतु बदबू के मारे उसका दिमाग चकरा गया। क्योंकि वहां भी कई लाशें पड़ी थी जिसमें से दुर्गंध आ रही थी।

         उससे वहां रुका नहीं गया वे शान्ति की खोज में बढ़ चला। वह पहाड़ी पर चढ़ा और चढ़ता ही गया पेड़ों से फल तोड़कर खाता और आगे बढ़ जाता परंतु अब फिर सन्नाटा था। उस सन्नाटे में उसे गहरी अशान्ति का अनुभव हो रहा था।

        सुबह उसकी नींद चिड़ियों की आवाज से खुली तो जैसे उसके दिमाग में खुशी की तरंगे हिलोरे लेने लगी। उसे बहुत आनंद का अनुभव हुआ परंतु धीरे-धीरे, जैसे-जैसे सूरज ऊपर उगता गया तो चिड़ियों का चहचहाना कम हो गया। वैसे ही उसकी खुशी भी कम होती गई परंतु उसे किसी दूसरे इंसान के वहां होने की पूरी उम्मीद थी इसलिए आगे बढ़ता गया।

         काफी दूर चलने पर सामने एक तपस्वी को तपस्या में लीन देखा तो उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा। वह फ़ौरन उसके चरणों में लेट गया। उसे लग रहा था कि उसकी मंजिल वहीँ है। वे शान्त तपस्वी ही उसे शान्ति दे सकते थे।

hindi stories in short

          पैरों पर दवाव पाकर तपस्वी ने धीरे-धीरे आँखें खोलीं। दूसरे इंसान को सामने देखकर उसे भी बहुत खुशी हुई थी। यह खुशी उन्हें नई आशा की किरण दिखा रही थी। तपस्वी को उस युवक में अपनी बेटी का पति दिखाई दे रहा था। उसे लगा कि अपनी पुत्री के हाथ पीले करके वे शान्तिपूर्वक तपस्या कर लेंगे।

तरुण मानव हाथ जोड़कर बोला,” ऋषिवर! आप आनंद दाता हैं। मुझे शान्ति का मार्ग बताएं।”

      ऋषि ने उसे आशीष देते हुए कहा, ‘वत्स! भगवान सबका भला करने वाला है। उसने तुम्हें विशेष योजना के अंतर्गत ही मेरे पास भेजा है। तुम्हारी शान्ति मेरे पास है और मेरी शान्ति तुम्हारे पास है।”

       युवक बोला, ” महाशय! आप तो परमशान्त दिखाई देते हैं। मुझे शान्ति का मार्ग आप ही बता सकते हैं।”

 तपस्वी बोला, ”वत्स! अकेला मनुष्य कुछ नहीं कर सकता। उसे अकेले शान्ति नहीं मिल सकती। योगी को योग का और संसारी को नारी का सहारा लेना ही पड़ता है। तभी शान्ति मिलती है। मैं परमात्मा से योग चाहता हूं तभी तो शान्त हो सकूंगा। तुम्हारा जब नारी से सहयोग होगा तुम्हें भी तभी शान्ति मिलेगी।”

hindi stories in short

       युवक को शांत का मंत्र मिल गया था। अत: उसने तपस्वी को प्रणाम किया और चलने को उघत हुआ। परंतु तपस्वी ने उसे जाने ना दिया। वे अपनी पुत्री का हाथ उसके हाथ में देकर अपने तप का मार्ग निष्कंटक करना चाहते थे। उन्होंने उसके सामने अपनी योजना रखी और अपनी पुत्री उसे देकर विदा कर दिया।

       सुंदर स्त्री पाकर तरुण प्रसन्न हो गया परंतु उसकी प्रशंसा अधिक देर तक कायम ना रह सखी। विवाह के बाद उसे स्त्री के भोजन का भी ख्याल रखना पड़ता था। अब वह स्वच्छन्द नहीं रह गया था। वह तो जैसा मिल जाए वैसा ही खा लेता था। परंतु स्त्री अलग-अलग चीजों की फरमाइश करती थी। जिससे वे शान्त कम अशांत ज्यादा रहने लगा था। फिर भी वह आगे बढ़ता गया क्योंकि शान्ति की खोज आवश्यक थी।

        थोड़ा और आगे जाने पर उसने एक बनवासी परिवार देखा। उसमें एक वृद्ध दंपति रह रहे थे। पास ही एक गाय और भैंस थी। युवक को लगा कि वे जरूर शान्त होंगे। क्योंकि आसपास खाने पीने की विविध सामग्री भरपूर मात्रा में थी। और वहां किसी प्रकार की गंदगी भी नहीं थी। पास ही स्वच्छ जल से परिपूर्ण नदी बह रही थी। वहां के वातावरण से युवक बहुत प्रभावित हुआ।

          वे दोनों आंगन में गए। युवक ने वृद्ध को और उसकी स्त्री ने वृद्धा को प्रणाम किया। उन दोनों को देखकर वृद्ध दंपति बहुत प्रसन्न हुए। युवक हाथ जोड़कर वृद्ध से बोला, “महाशय! आपका जीवन कितना शान्तिपूर्वक है? यहां बहुत सुख  अनुभव हो रहा है।”

 वृद्ध ने कहा, “पुत्र यहां पर न सुख  है और ना ही शान्ति। तुम दोनों के आने के कारण ही यहां खुशी हुई है।”

hindi stories in short

  युवक बोला, “महाशय! आप दोनों की अशान्ति का कारण क्या है?”

  वृद्ध ने कातर स्वर से कहा, “पुत्र! जब तक व्यक्ति सन्तान उत्पन्न करके कर्ज नहीं चुकाता तब तक वह सफल व्यक्ति नहीं कहा जा सकता। हम दोनों सन्तान विहीन हैं। यही हमारा अशान्ति का कारण है।”

        वृद्ध दंपति ने उन दोनों से आग्रह किया कि वे वही रहे। यहां पर घर भी है और पशु भी उससे हमारा सन्तान योग भी मिट जाएगा। और तुम्हार गृहस्थ धर्म भी आसानी से निभ जाएगा। उन दोनों का यह आग्रह वह टाल नहीं पाए। युवक ने एक दिन सोचा कि शान्ति की खोज में वह अशान्ति की तरफ ही बढ़ता जा रहा है। आखिर इस भंवर से वह कैसे निकलेंगा? उसने सोचा कि इस जाल से निकलने में ही भलाई है।

         परिवार के 15 दिनों के राशन का प्रबंध करके एक दिन वह घर से निकल गया और ऊंचाइयों की ओर बढ़ गया। नदी, पेड़ पीछे छूट गए। जंगल भी समाप्त होने लगे। बर्फ के पहाड़ ही सामने थे। उसकी हिम्मत पस्त होने लगी थी। तभी उसे एक गुफा का द्वार दिखाई दिया और वह उसमें घुस गया।

         अंधकार में वह काफी दूर चलने से बहुत थक गया था। परंतु उसकी  अशान्ति बेहद बढ़ गई थी ना कहीं बदबू और ना ही कोई परेशान करने वाला था। लेकिन उसकी अशान्ति की कोई सीमा नहीं थी। फिर उसे प्रकाश नजर आया और वह उसी दिशा में बढ़ गया। उसे कुछ आशा महसूस होने लगी थी। उसे अपनी स्त्री की भी याद आ रही थी। जैसे-जैसे तीन दिन पहले छोड़ आया था।  अंत में वे थक कर चूर हो गया और फिर वह गिर पड़ा।

hindi stories in short

          पता नहीं वह कब तक पड़ा रहा? जब उसकी चेतना जागी तो उसने अपने सामने एक तपस्वी को बैठे देखा। सफेद धवल किस राशि वाले महात्मा दयालु नेत्रों से उसे देख रहे थे। उन्हीं के शरीर से तेजोमय प्रकाश फूट  रहा था। यहां उसे अति शान्ति अनुभव हुई परंतु बार-बार उसका ध्यान बनस्थली में रह रही अपनी पत्नी में ही जाकर उलझा रहा था। और उसकी शान्ति भंग हो रही थी। धीरे-धीरे वह उठकर और सामने बैठे ऋषि की ओर देखा। वे भी उसकी ओर देख रहे थे।

        तपस्वी ने उस तरूण मानव से कहा, “तुम भी उस मृग(हिरन) का अनुकरण कर रहे हो, जो कि पूरे जीवन कस्तूरी को ढूंढता रहा और कभी उसे खोज नहीं पाया। तुम शान्ति ढूंढ रहे हो, कोई जगह ऐसी नहीं है जहां शान्ति नहीं हो।” ऋषि ने आगे कहा, “भूतकाल का बोझ लेकर क्यों जी रहे हो? और क्यों रोते हो? लाख चाहने पर भी जिसमें परिवर्तन नहीं हो सकता वह अतीत किसी का ना कुछ बिगाड़ सकता है और ना संभाल सकता है। संसार ईश्वर में व्याप्त है बाल, वृद्धि, युवक सभी में परमात्मा है। सृष्टि में जो भी सत्य, शिव और सुंदर है वह परमात्मा ही परमात्मा है। इसी परमात्मा को ही अपना भूतकाल समर्पित कर दो और सब में इसे निहार कर समर्पण भाव से जीवन जिओ।”

What will happen to India and China and America

after coronavirus | कोरोना युग के बाद भारत और चीन और अमेरिका का क्या होगा? Read More

Corona Virus is end of earth
HINDI KAHANIYA PRO

Corona Virus is end of earth : क्या कोरोना वायरस दुनिया का अंत है ? Read More

how to become intelligent
HINDI KAHANIYA PRO

how to become intelligent: मै बुद्धू नहीं हूँ Read More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

Email marketing kya hai

Email Marketing Kya Hai ? इससे कैसे पैसे कमाए जा सकते हैं?Email Marketing Kya Hai ? इससे कैसे पैसे कमाए जा सकते हैं?

इस पोस्ट में मैं आपको बताऊंगा कि Email marketing kya hai ? . और इससे कैसे पैसे कमाए जा सकते हैं ? इस post में मैं आपको कुछ ऐसे तरीके

READ MOREREAD MORE
inspirational stories in hindi

सच पूछो तो सब को हमसे क्या चाहियें |hindi kahaniyan newसच पूछो तो सब को हमसे क्या चाहियें |hindi kahaniyan new

hindi kahaniyan new एक राजा था। लाखों उपाय करने पर भी वह पुत्र प्राप्ति से वंचित रहा। दो-तीन शादियां भी करवाई लेकिन पुत्र प्राप्ति कामना पूरी यही हो सकी। राजा

READ MOREREAD MORE