how to avoid bad habits

ibrahim बुरी आदत :

इब्राहिम | बुरी आदत

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बुरी आदत : भगवान का अनादर

इब्राहिम साधु – स्वभाव के व्यक्ति थे । उनका सारा समय ईश्वर की भक्ति में बीतता । वह जिससे भी मिलते, भगवान् की कृपा ही की चर्चा किया करते । धार्मिक प्रबर्ती ने उन्हें दयालु बना दिया था । रोजाना वह किसी राहगीर को भोजन करने के बाद ही खुद भोजन करते ।

एक दिन रात को उन्होंने अपने घर के आगे एक बूढ़े मुसाफिर को गुजरते देखा । पूछने पर पता लगा कि उस बूढ़े आदमी को पास कि ही गांव में जाना था । अँधेरा हो चूका था, इसलिए इब्राहिम ने बूढ़े से उस रात अपने घर में विश्राम करने को कहा । बूढ़ा इस बात कि लिए मान गया ।

घर पहुंच कर इब्राहिम ने उस बूढ़े के लिए बड़ी प्यार से खाना बनाया । फिर हाथ मुँह धुला कर उसके आगे खाना परोसा । बूढ़े ने अभी पहला ही कोर मुँह में डाला था कि इब्राहम बोले,”महोदय, भगवान् कितना दयालु है ।”

बूढ़े मुसाफिर ने खाना खाते खाते जवाब दिया,” समझ में नहीं आया कि आपने ये बात क्यों कही ?”

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हिंदी कहानियां

इब्राहिम मुस्कुरा कर बोले,” यह दयालु भगवान की ही तो कृपा है कि रात कि सफर में आपको अगले गांव का सफर करना नहीं पड़ा । यदि कृपालु भगवान कृपा नहीं करते तो आपको भूखे प्यासे धुल से भरे रस्ते पर पूरी रात सफर करना पड़ता ।”

बूढ़े आदमी ने इब्राहम की बातो से जरा भी प्रभावित ना होते हुए कहा,” इसमें भगवान कि कृपा कहाँ ? यह मेरा भाग्य और आपका अच्छा स्वाभाव है जिसके कारण मुझे ये सभ प्राप्त हुआ ।”

“तो क्या आप ये नहीं मानते कि आपको ये सभु सुबिधायें भगवान की कृपा से नसीब नहीं हुई हैं ?” इब्राहिम ने हैरान होकर पूछा ।

“मुझे भगवान और उसकी कृपा में तनिक भी विश्वास नहीं । इंसान हर सुबिधा अपनी मेहनत , अपने व्यबहार और कुछ हद तक अपने भाग्य से प्राप्त करता है ।” बूढ़े आदमी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया ।

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इब्राहिम को बहुत गुस्सा आया । उन्होंने बूढ़े आदमी से खाना छोड़ कर तुरंत घर से बहार निकल जाने को कहा । बूढ़ा आदमी इब्राहिम को देखता हुआ घर से बहार निकल गया । बहार काफी अँधेरा था । इब्राहिम कि मन में कुछ दया भी उभरी, लेकिन फिर भी वह भगवान की कृपा को ना मानने बाले को अपने घर में रुकने को तैयार नहीं हुए । जब इब्राहिम सो गए तो उन्हें सपने में भगवान ने पुकारा । आवाज सुन कर इब्राहिम उठे । भगवान ने उनसे पूछा ,” इब्राहिम बूढ़ा आदमी कहाँ है ?”

“प्रभु, उसे तो मैंने निकल दिया है,” इब्राहिम ने जवाब दिया ।

भगवान ने पूछा,”क्यों?”

“उसने आप का अनादर किया था, प्रभु । इसलिए मैंने उसे घर से निकल दिया ।” इब्राहिम ने नर्मता से उत्तर दिया ।

“इब्राहिम, वह बूढ़ा पुरे सो साल से मेरा अनादर कर रहा है, लेकिन मैंने उसका अहित नहीं किया । तुम उसे एक दिन भी नहीं सेह पाए । तुम कैसे महात्मा हो ! तुम फिर मेरे बनाये जीवों का अनादर कर के मेरा आदर कैसे कर सकते हो ?” भगवान ने कहा और अलोप हो गए ।

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हम भी अक्सर इब्राहिम बलि भूल कर बैठते हैं । इससे बचना ही श्रेयकर है ।

इस  कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है कि हमें कभी किसी की बात का बुरा नहीं मन्ना चाहिए । और ना ही किसी को बुरा कहना चाहिए । हम सब एक ही ईश्वर की संतान हैं । इस प्रकार हम एक ही परिवार हैं । आओ दोस्तों हम प्राण लें की हम किसी का भी बुरा नहीं सोचेंगे और ना ही किसी का बुरा करेंगे ।

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