moral hindi story Of India |बर्तनों के बच्चे

वरदान एक अनोखी कहानी

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moral hindi story Of India: बर्तनों के बच्चे

बर्तनों के बच्चे
पुराने समय में सेठ लोग अपनी शोभा करवाने के लिए अनेक उपाय बरतते थे‌। कोई कुआं खुदवा देता था कोई कुआं खुदवा देता था, कोई प्याऊ लगवा देता था तो कोई आए गए यात्रियों के लिए सराय बनवा देता था। आज भी सेठ लोग इस तरह के काम करके यश प्राप्ति की कामना करते हैं। ऐसा ही एक सेठ लाहौर में रहता था।
उसने वहां बाई हासिल करने के लिए विवाह शादियों के अवसर पर काम आने वाले बर्तन जैसे बड़े-बड़े ‌, थाल थालियां ,कटोरे कटोरिया ,पतीले पतीलिया, आदि खरीद कर इकट्ठे कर रखे थे। लोग यह बर्तन गिन कर ले जाते, शादी संपन्न होने के पश्चात गिन कर लुटा देते।नगर में लोग उस सेट की इस सेवा की खूब प्रशंसा करते जिससे उसे खुशी प्राप्त होती थी।
और सेठ जी को बहुत अच्छा लगता था कि लोग उनकी प्रशंसा करते हैं। एक बार एक व्यक्ति, जो उसी नगर में रहता था, आया और चाय पार्टी के लिए कुछ बर्तन गिन कर ले गया। जब मैं बर्तन लुटाने आया तो उन बर्तनों के अतिरिक्त कुछ और बर्तन अपनी तरफ से भी साथ ले आया । सेठ ने अपने बर्तन के लिए और बाकी के बर्तन ये कहते हुए वापस लौटा दिए कि यह बर्तन मेरे नहीं है।
उस व्यक्ति ने बड़ी नम्रता से निवेदन किया, सेठ जी, यह बर्तन आपके ही हैं। बात यह है कि रात को आप के बर्तनों ने इन्हें जन्म दिया है। इसलिए, आप के बर्तनों के बच्चे होने के कारण यह बर्तन भी आपकी ही हैं। पहले तो सेट मैं बर्तन लेने से इंकार कर दिया लेकिन तभी शैतान लालच ने चुपके से बार कर दिया और सेठ ने चुपचाप अतिरिक्त बर्तन भी रख लिए। कुछ दिनों के पश्चात भी व्यक्ति फिर आया और काफी सारे बर्तन ले गया। इस बार भी जब वह  बर्तन लोटाने आया, तो फिर कुछ अतिरिक्त बर्तन ले आया।
सेठ को इस बार वे बर्तन लेटे हुए रत्ती भर संकोच ना हुआ, क्योंकि लालच का टीका अपना पूरा असर कर चुका था। खैर , इसी तरह एक बार फिर भी आया और लंगर के बहाने सारे बर्तन ले गया। यहां तक कि घर के बर्तन, ज्योतिषी कीमती धातु के बने हुए थे, वह भी ले गया। सेठ ने खुशी-खुशी सारे बर्तन दे दिए।दूसरे दिन भी व्यक्ति बर्तन लेकर वापस नहीं लौटा पहले तो सेठ शांत रहा, लेकिन जब वे तीसरे दिन भी नहीं आया तो सेठ को चिंता हो गई। सेठ ने एक-दो दिन और इंतजार किया, पर वह नहीं लौटा और ना ही उसने बर्तन वापस भिजवाए।
अब तो सेठ घबरा गया। घबराकर में स्वयं उस व्यक्ति के घर पहुंच गया। उस व्यक्ति के घर पहुंचकर सेठ गुस्सा होकर उस व्यक्ति से बोला, भाई तुमने अभी तक बर्तन क्यों नहीं लौट आए
उस व्यक्ति ने रोनी सी सत्तू बना कर कहा, सेठ जी क्षमा करें आप के बर्तन तो उसी रात ही परलोक सिधार गए थे। सेट क्रोध से आगबबूला होते हुए बोला, बर्तन कैसे परलोक सिधार सकते हैं।
इस व्यक्ति ने रहस्य भरी आवाज से कहा,बर्तन यदि बच्चे दे सकते हैं तो क्या उनकी मृत्यु नहीं हो सकती यह सुनकर सेट का सिर शर्म से झुक गया। अपने लालच पर शर्म करते हुए मैं अपने घर लौट गया।
लालच शुरू में तो सुख दाई प्रतीत होता है, लेकिन इसका अंत दुख से होता है
moral hindi story
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए लालच इंसान को बर्बाद कर देता है जो भी इस कहानी को पढ़ रहे हैं उन्हें आज से ही इस कहानी को पढ़कर लालच छोड़ देना चाहिए और जो लालच नहीं करते हैं वह इस कहानी को पढ़ रहे हैं तो वह बहुत किस्मत वाले हैं दोस्तों अगर कोई तुम्हारे आसपास लालच करता है तो उसको यह शेयर करो जिससे उसकी जिंदगी बदल जाए

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