One Of The Best Story [2020] आज की कहानी

आज की कहानी

सहनशीलता अर्थ


सहनशीलता की परिभाषा

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hindi story – आज की कहानी : एक बार एक आदमी ट्रेन से कही जा रहा था। वह खिड़की के पास बैठा हुआ था । उसके डिब्बे में और भी बहुत -से यात्री बैठे हुए थे ।उन व्यकितयों में से एक व्यकित जिस स्थान पर बैठा  हुए था , वही पर थूक रहा था । पास में बैठे यात्रियों को उसकी इस  हरकत से परेशानी हो रही थी । तभी खिड़की के पास बैठे आदमी ने अपना स्थान छोड़ उस आदमी से कहा – श्रीमान , आप इधर खिड़की के पास आ जाइए। आपको यहाँ से थूकने में आसानी होगी। और किसी को परेशानी भी नहीं होगी ।यह सुनकर उस आदमी ने क्रोधित होते हुए कहा – मैं क्या करूँ ? में जहाँ बैठा हूँ , ठीक हूँ ।” तुम्हे इससे क्या ? में खिड़की के पास क्यों जाऊं ? यदि किसी को अच्छा नहीं लग रहा हैं तो वह दूसरे डिब्बे में चला जाए।”ऐसा  कहकर उस आदमी ने जान -बूझकर फिर वही थूक दिया । खिड़की के पास बैठे आदमी ने उस व्यकित की बात का बुरा नहीं माना । उस आदमी ने अखवार के टुकड़े से उस थूक को उठाकर खिड़की के बाहर फेंक दिया । फिर तो यह क्रम चालू हो गया कि वह व्यकित थूकता और दूसरा उस थूक को उठाकर खिड़की के बाहर फेंक देता ।

hindi story – आज की कहानी

ऐसा बहुत देर तक होता रहा ।अंत में वह थूकने वाला व्यकित थूकते- थूकते थक गया। इसी बीच वह स्टेशन आ गया जहाँ उन दोनों व्यक्तियों को उतरना था । स्टेशन पर बहुत भीड़ थी। प्लेटफ्रॉम पर बहुत -से व्यकित फूल -मालाएं लिए खड़े थे । वे सब  किसी महान व्यकित के स्वागत के लिए वहां खड़े थे ; जैसे ही गाड़ी स्टेशन पर आकर रुकी तो नारों से पूरा स्टेशन गूँज उठा । चारो तरफ गांधी जी जिंदाबाद के नारे सुनाई दे रहे थे ।वह व्यकित जो ट्रेन में बार -बार थूक रहा था , गांधी जी के दर्शन के लिए लालायित हो रहा था । गांधी जैसे ही ट्रेन के डिब्बे से बाहर आए सभी लोगो ने उन्हें मालाओ  से लाद दिया । थूकने वाला व्यकित गांधी जी को माला पहनाने के लिए भीड़ को चीरता हुआ गांधी जी तक पंहुचा और जैसे ही उसने गांधी जी के गले में माला  पहनाई , दोनों ने एक दूसरे को देखा । गांधी जी तो उसे देखकर मुस्करा दिए , परन्तु वह व्यकित उन्हें देख कर बुरी तरह शर्मिंदा हो गया ।

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उसके थूक को बार -बार अख़बार से उठाकर खिड़की के बाहर फेंकने वाला व्यकित और कोई नहीं , बल्कि गांधी जी ही थे , जिनके दर्शन के लिए वह वहाँ आया था । उसने हाथ जोड़कर गांधी जी से माफी मांगी और भविष्ये में फिर कभी ऐसा कभी न करने की कसम खाई

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि ,यदि हमें महान बनना हैं तो हमें सहनशील बनना होगा क्रोध को त्यागकर दया व प्रेम का व्यवहार करना होगा ।दोस्तों सेहन करना एक बहुत बड़ी महानता है । वीर इंसान कि पहचान है । वास्तव में वही इंसान बहादुर है जो अपने आपको इतना सेहन शील बना ले कि उसको कोई भी इंसान अपनी कड़बाहत भरे शब्दों से विचलित नहीं कर सके।

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